Friday, 18 December 2020

ऐसी कौनसी भारतीय वाहन निर्माण कंपनी है जो बीएमडब्लू का मुकाबला कर सकती है?

 आज का दौर कारों का है, हवाई जहाजों का है, नए नए कीर्तिमानों का है. एक समय था जब टोयोटा कंपनी ने भारत की ओर देखते हुए कहा था की आप १०० टाटा जैसी कंपनियां खड़ी कर सकते हैं, लेकिन एक टोयोटा आपके बस से बाहर है. सही बात थी. टोयोटा आज भी राज करती है. टॉप ३ सेल्लिंग गाड़ियों में उसके गाडी हैं.

लेकिन, लेकिन, लेकिन ये कहावत सुना है आपने.

“करत-करत अभ्यास से जडमति होत सुजान।

रसरी आवत-जात से सिल पर पडत निसान॥”

आज हमारी कंपनियां अभ्यास के दौर से गुजर रही हैं और मुझे लगता है की पत्थर पर निसान भी जरूर पड़ेगा. और ये निसान अगर कोई भारतीय कंपनी डालेगी तो वो है टाटा. आपको शायद आश्चर्य होगा मेरी बात पर, लेकिन मेरी इस बात के स्क्रीनशॉट लेकर रख लें आप. शायद हम आप नहीं, लेकिन हमारी आगे की जनरेशन जरूर इस बात से सहमत होगी. उसके कारण भी हैं भाई साब. कोशिश करता हूँ आपको बताने की.

ये ऊपर जो फ़ोटो mention की गयी है, ये टाटा की racemo sports कार है जो जल्दी मार्किट में आने वाली है।

कोई भी कंपनी, किसी भी देश के पैर कैपिटा इनकम और जीडीपी को ध्यान में रखकर ही उस बाजार के लिए अपने उत्पाद बनाती है. अब जैसे भारत की अगर पर कैपिटा इनकम १००००० रुपये प्रति साल है तो कंपनियां ६-११ लाख के प्रोडक्ट पर ज्यादा फोकस करती हैं. अमेरिका का पर कैपिटा इनकम ज्यादा है तो उस हिसाब से गाड़ियां बनाती हैं. 

जहाँ तक बात हैं भारत की तो ज्यादातर भारतीय कंपनियां अभी किशोरावस्था में हैं जो जवानी की दहलीज पर पैर रखने को फडफडा रही हैं. किसी भी कंपनी का सबसे ज्यादा खर्च आता है उसके रिसर्च और डेवलपमेंट में. 

आपने बोला बी एम् डब्लू कंपनी का, तो इस कंपनी का आर एंड डी का खर्चा है २०१८ में लगभग ८.५ बिलियन डॉलर, और टाटा की पूरी ऑटोमोटिव इंडस्ट्री का वैल्यू है लगभग १४ बिलियन डॉलर और ये बी एम डब्लू १९३० से ही गाड़ियां बना रही है और कंपनी की टोटल वर्थ वैल्यू है लगभग ५४ बिलियन डॉलर. सबसे बड़ी बात की ये कंपनी लक्ज़री गाडी ही बनाने में बिश्वास करती है. सबसे पहली और बड़ी खाई ये है.

टाटा १९९० से गाड़ियां बना रहा है, जैसे तैसे अपने बलबूते पर. फिर फ़िएट के साथ करार करके उसके डीजल इंजिन्स को अपने गाड़ियों में प्लांट करना शुरू किया. मेरे कहने के पीछे जो सबसे बड़ा तर्क है वो है २०११ में टाटा का धमाका जो उसने लैंड रोवर, जैगुआर का अधिग्रहण किया. आपने उसके बाद टाटा की गाड़ियों को देखा है. अगर नहीं तो आप जरूर एक बार अंदर बैठ कर देखें. ये सभी जैगुआर के आर एंड डी से प्रेरित हैं. 

उसके बाद तो टाटा को तुरुप का इक्का मिल गया. उसने जैगुआर के एक्सपीरियंस को इंडिया में भुनाना शुरू किया जिसके परिणाम भी अच्छे आने लगे. टिआगो, टैगोर, नेक्सॉन, हरियर, हेक्सा में टाटा ने जैगुआर डिज़ाइन से काफी इंस्पिरेशन ली है. निकट भविष्य में उसकी महत्वकांछी परियोजना है जैगुआर, लैंड रोवर के रिसर्च एंड डेवलपमेंट की वृद्धि और उसके टेक्नोलॉजी का विश्वीकरण. 

जिसमे टाटा का मजबूत और नपा तुला प्रबंधन जरूर सफल रहेगा ऐसी मेरी आशा है, और समय जो भी लगे लेकिन निकट भविष्य में जरूर ये संभव है की टाटा, बी एम् डब्लू से बेहतर ना हो लेकिन उसके समतुल्य गाड़ियों को बनाने की कोशिश जरूर करेगा.

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