Monday, 24 June 2019

Virat Kohli Biography | 10 success secrets of Virat Kohli | Case Study



दोस्तो मुझे नहीं लगता कि विराट कोहली का नाम इस क्रिकेट जगत में किसी परिचय का मोहताज है। जिस तरह उन्होंने तेज़ गति से क्रिकेट में रन बनाए हैं उतनी तेज गति से उन्होंने लोकप्रियता भी पाई है। क्रिकेट के बिसेसग्य तोह उन्हें भविष्य का सचिन तेंदुलकर मानते है। क्यूं की वह तेंदुलकर की तरह ही बहुत ही सूझबूझ के साथ बल्लेबाजी करते है।  हाल ही में महेंद्र सिंह धोनी के सभी फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ने के बाद विराट तीनों फॉर्मेट के कप्तान बन गए है।

 दोस्तो हम आज इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी के सफलता के बारे में जानेंगे और इनसे कुछ चीजें सीखने की कोशिश करेंगे। विराट कोहली का जन्म 5 नवंबर 1988 को दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनकी पिता प्रेम कोहली पेशे से एक वकील थे और माँ सरोज एक हाउसवाइफ है।  वह अपने परिवार में सबसे छोटे हैं, उनका एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन भी है।





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 विराट की मां कहती है जब वह 3 साल के थे तब से उन्होंने बैट पकड़ लिया था, और अपने पापा को अपने साथ खेलने के लिए हमेशा परेशान किया करते थे। कोहली दिल्ली के उत्तमनगर की गलियों में बड़े हुए और विशाल भारती पब्लिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण की थी। उनका क्रिकेटके प्रति रूचि देख कर उनके पड़ोसियों का कहना था कि विराट को गल्ली क्रिकेट में समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।


वल्कि उसे किसी अकाडेमी से प्रोफ़ेशनल तोर पे क्रिकेट सीखना चाहिए। कोहली के पिता  पड़ोसी के कहने पर 9 वर्ष की उम्र में ही उन्हें डेल्ही क्रिकेट अकडेमी में भर्ती करदी। दोस्तों अगर भारत में क्रिकेट को  कोई कैरियर के तोर पर देखता है तोह ये करियर ऑप्शन सबसे ज़यादा रिस्की माना जाता है। क्यूं के भारत में १० में से ८ लोग क्रिकेट खेलने और देखने  शौकीन मन जाता है। लेकिन अगर विराट के पिता और उनके पड़ोसियों जैसा कोई सपोर्ट करने वाला मिल जाए ना तो सब कुछ आसान हो जाता है।






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विराट को राजकुमार शर्मा  ट्रेनिंग दी , खेलो के साथ साथ  विराट कोहली पढ़ाई में भी बहुत अच्छे थे। उनकी शिक्षक उन्हें एक होनहार और बुद्धिमान बच्चा बताते है। विराट कोहली ने क्रिकेट में शुरुआत अक्टूबर २००२ से की थी। जब उनको दिल्ली के अधीन में शामिल किया गया था। उस समय विराट ने २००२-३ की Polly Umrigar ट्रॉफी  पहेली बार प्रोफ़ेशनल क्रिकेट खेला था। वर्ष २००४ के अंत तक उन्हें Under 17 डेल्ही क्रिकेट टीम की सदश्य बना दिया गया था। तब उन्हें विजय मार्जिन ट्रॉफी के लिये खेलना था।

इन 4 मैच  में उन्होंने 450 से ज़यादा रन बनाये थे। सबकुछ सही चल रहा था लेकिन अचानक 18 Decembor 2006 में Brain Stroke की वजह से कुछ दिन बीमार रहने के बाद उनकी पिता की मृत्यु हो गई। जिसका विराट  जीबन में बहोत गहरा प्रभाव पड़ा था। वह आज भी इंटरव्यू में  उनके सफलता के पीछे अपने पिता का हात बताते है। कोहली का कहना है की ये समय मेरे और मेरे घरवाले के लिए काफी मुश्किल था। आज भी उस समय को याद करते हुए मेरी आखें नॉम हो जाती है। बचपन से ही क्रिकेट प्रशिक्षण में उनके पिता ने उनकी बहोत मदत की थी।


 मेरे लिए मेरे पापा ही सबसे बड़ा सहारा थे। पापा रोज़ मेरे साथ क्रिकेट खेला करते थे। आज भी कभी-कभी मुझे उनकी कमी महसूस होती है। जुलाई 2006 में विराट कोहली को भारत के Under 19 टीम में चुन लिया गया। और उनका पहला विदेशी टूर इंग्लैंड था। इस इंग्लैंड टूर में उन्होंने 3 मैचों में 105 रन बनाए थे। March 2008 में विराट कोहली को India की Under 19 Team की कप्तान बना दिया गया। उनको मलेशिया में होने वाले वर्ल्ड कप की कप्तानी करनी थी।




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इस वर्ल्ड कप में उन्होंने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया था। कोहली को 2009 में  इंडियन क्रिकेट टीम में श्रीलंका दौरे के लिए चुन लिया गया था। इस टूर की शुरुआत में उन्हें India Team A के लिए खेलने का मौका मिला था। इसके बाद जब भारत के ओपनर सहवाग और तेंदुलकर दोनों घायल हो गए थे ,तब पहेली  विराट को उनकी जगह पर खेलने का मौका मिला था। इस टूर में उन्होंने 50 रन किया था और भारत की जीत हुई थी।




बस तभी से विराट ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और बहुत ही तेज़ गति से अपने खेल के बदलौत उन्होंने क्रिकेट में लोकप्रियता भी प्राप्त कर ली और आज वह भारतीय क्रिकेट टीम के तीनो Format के कप्तान बन चुके है। विराट कहते हैं की मै सामने वाले को नहीं देखता की वह कितना बड़ा खिलाडी है , में  बस इतना सोचता हु की मेरे पीछे करोड़ो फैंस का आशिर्बाद है।



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This Story is Based on my Research
It may not be 100% Accurate



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