Wednesday, 26 June 2019

कोमा से बहार निकलने के बाद जो कहा मार्टिन ने सुनकर होश उड़ जायेंगे



क्या आपने कभी नर्क को अपने खयालों में इमेजिन किया है, कैसी दिखती होगी वह जगह, क्या आप वहां जाना चाहोगे,अगर आप एक इंसान हो तोह आप अपने दुश्मनों को भी वहां भेजना नहीं चाहोगे। लेकिन दुख की बात तो यह है कि कुछ लोगों ने अपनी जिंदगियों में हिं नर्क को देखा है. और लौट के वापस भी आए हैं वहां के किस्से सुनाने। Martin Pistorius साउथ अफ्रीका में रहने वाला एक आम सा 12 साल का बच्चा था, उसकी जिंदगी काफी खुशी से गुजर रही थी , जनवरी 1988 में उसके साथ एक ऐसी घटना हुई , जो उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल डालेगी।



उस दिन जब वह स्कूल से वापस आ रहा था तब उसने बताया था कि उसके गले में थोड़ीसी खराश है। जो सुनने तोह इतनी बड़ी बात नहीं लगरही थी , लेकिन दुखद बात तो यह थी कि उस दिन के बाद Martin कभी वापस स्कूल नहीं जाने वाला था। महीने भर में ही उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई , कुछ ही दिनों बाद उसकाअपने शरीर पर से नियंत्रण खत्म हो गया। और इसके साथ-साथ मानसिक रूप में सोचने और समझने की क्षमता और यहां तक याददाश्त भी कमजोर हो गई।




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और इससे पहले कि किसी को कुछ पता चलता वह कोमा में चला गया।अब इस बीमारी की क्या वजह थी यह तो आज तक किसी को पता नहीं चल सका। लेकिन डॉक्टर्स का तोह यह मानना था कि उसे CRYPTOCOCCAL MENINGITIS या फिर CEREBRAL TUBERCULOSIS हो सकता है। क्यों की उसे पहले भी ये बीमारियां रहे चुकी थी। पर अब बहुत लेट हो चुका था। और उसे अब ठीक करवाने के लिए डॉक्टर के पास कोई तरीका नहीं था। सारे ट्रीटमेन Martin पर फेल होने के कुछ ही दिनों बाद उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया, और उनके माता पिता को यह बताया गया कि आप भगवान या फिर कोई चमत्कार ही उनके बच्चे को बचा सकता है।



Martin पूरी तरह बाहरी दुनिया से संबंध तोड़ चुका था और वह सिर्फ एक जिन्दा लास की तरह था , और उसके वापस पहले जैसे होने की संभावना भी ना के बराबर थी। सब लोग उसके ठीक होने की कामना कर रहे थे , लेकिन वह ठीक अब कितने समय बाद होता या फिर कभी होता भी, यह कोई नहीं बता सकता था। वैसे आंकड़े अनुसार कोमा में जाने के बाद लगभग 58% लोग कभी वापस जिंदा नहीं हो पाते, और उसमें से भी 4 दिन कोमा में रहने के बाद जिंदा हो पाने या होश में आने के चांस सिर्फ 7% बचता है। जो दो हफ्ते बाद सिर्फ 2% हो जाएगा। तोह इंसान के पास ज्यादा समय नहीं होता कोमा से लड़के बाहर निकल पाने के लिए।




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लेकिन यह काफी चौंकाने वाली बातें थी की Martin आंकड़ों को चुनौती देते हुए काफी लंबे समय तक ज़िंदा रहे सका, और साथ में ही उसके वापस ठीक होने की उम्मीद। केया ये बास्तबिकता जिसमे Martin जी रहा था , केया वह एक असल ज़िन्दगी थी। 10 साल से भी ज़्यादा समय मार्टिन घर पर बिताया एक जिंदा लाश के रूप में। अब तक सब यह मान चुके थे कि बस खत्म अब, अब कोई भी उम्मीद नहीं बची है। Martin की मां भी भावुक होकर उसके सामने रोते हुए कहती कि उसे इस दर्द से आजादी मिल जाए।




लेकिन एक दिन एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने सभी को हिला कर रख दिया ,25 साल की उम्र में Martin को होश आचुकी थी। उस दिन सभी खुशी के आंसू रोए, लेकिन कहानी बस यहां पर खत्म नहीं होती क्योंकि Martin के होश में आते ही खुलने वाला था वह सभी रहस्य जो वह अंदर 10 साल से दबाए हुए था। वह एक ऐसी सच्चाई बताने वाला था जिसे सुनकर सभी के रोंगटे खड़े होने वाले है। Martin के मुताबिक कोमा में जाने के कुछ ही सालों बाद वह होश में आ गया। उसकी Consciousness दोबारा आ गई थी, उसे पता चलने लग गया था कि क्या-क्या हो रहा है आसपास, लेकिन उसका शरीर अभी भी बेजान पढ़ा था।





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वह सबकी बातें सुन तो सकता था लेकिन कुछ भी बोल नहीं सकता था, बिल्कुल किसी भुत की तरह। वह एक एसी राक्षसों की दुनिया में कैद हो गया था जहां से वापस आना नामुमकिन था। उसने कहा कि जिस दिन उसे यह बात का अहसास हुआ कि अब वह दुनिया को इसी तरह ही देख और महसूस कर पाएगा उसे बहुत दर्द हुआ, वह अंदर से बिल्कुल नॉर्मल हो गया था लेकिन यह बात कैसे बाहर पहुंचाया जाए की वह ठीक हो गया है जब वह अपनी एक उंगली ना उठा सके,अपनी पूरी जिंदगी एक लाश की तरह जीने के अलावा और कोई भविष्य नहीं दीखता।




उससे भी दुखद बात यह है कि उसे अपने मां के रोने की आवाजें भी सुनाई देती , और वह उन्हें यह कहते हुए भी सुन सकता था कि अच्छा होता की अगर ये सब कुछ इधर ही खत्म हो जाए तो। आप इमेजिन कर सकते हो की केया बीत रही होगी Martin के ऊपर उस बक्त। लेकिन वह अपने माँ को समझ सकती थी की वह येसब उसी की भलाई के लिए सोच रही थी।






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लेकिन Martin के पिता शायद एक एसे इंसान थे जिन्हें अपने बेटे पर पूरा भरोसा था ,वह हर रोज उसे साफ करता था , अपने हाथों से खाना खिलाते और उसके शरीर का मसाज करते थे , ताकि वह स्वस्थ रहे सके। अपने दिमाग को ट्रैन करने के लिए Martin अपने दिमाग में ही सारे पहेलियां सुलझाया करता था। यहाँ तक Calculation भी करता था। Martin ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया था कि यह ही अब उसकी दुनिया है।





अब यह कहना गलत नहीं होगा कि, ऐसी परिस्थिति में अगर कोई भी नॉर्मल इंसान अपने आप को ही खो बैठेगा और शायद फिर से पागल हो जाए, लेकिन उसने हिम्मत बनाये राखी। और आखिर में उसे यही हिम्मत ने सफलता दी। उसदिन सब कुछ बदल गया जब Martin के रेगुलर PARAMETER CHECKUP उसने किसी तरह से ये जाता दिया की वह होश में आचुका है , ये बात उसने सिर्फ अपनी आंखों से जताई और खुशकिस्मती से उस पर गौर भी कर पाया गया। उसके बाद उसे तुरंत एक Special Centre ले जाया गया। जहाँ पर उसपे कुछ टेस्ट किये गए ये जानने के लिए की वह असल में Conscious है फिर ये सरे सिर्फ एक इत्तेफाक था।





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और फिर जब मार्टिन ने सारे टेस्ट पास कर दीए तो सबको मालूम पड़ गया कि यह आखिर सच्चाई ही है। उसके बाद Martin की माँ ने अपनी जॉब छोड़ दी और वह Martin की ख्याल रखने में लग गई। उसके बाद उन्होंने एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम बनाया जिसकी मदद से मार्टिन बाते कर सके और इतना ही नहीं जैसे ही उसके पास बात करने की काबिलियत आ गई उसने अपनी कॉलेज डिग्री तक ले ली। उसके बाद उसे एक Web Development Company में उसे जॉब भी मिल गया।




इसे कहते हैं असली जज़्बा , जल्द ही मार्टिन के चेहरे पर Facial Expression आना भी शुरू हो गए और उसका पूरा शरीर ही काम करने लगा। उसने अपनी बहन की एक दोस्त से शादी कर ली। और उसके बाद वह हमेशा खुस रहा। 2011 में उसने एक बुक भी पब्लिश की GHOST BOY के नाम से। जिसमे उसने अपने सारे अनुभव शेयर की है और बताया कि कैसे वह एक एसे दुनिया में कैद था , जहां वह दोबारा कभी भी नहीं जाना चाहेगा और कोई भी नहीं जाना चाहेगा। Martin सभी के लिए एक इंस्पिरेशन है, जो यह साबित करता है कि उम्मीद , निश्चयता और मेहनत से ज़िन्दगी में कुछ भी हासिल करसकते हो।




मुझे पर्सनली इनकी कहानी भी हमारे प्रिय साइंटिस्ट Steven Halking से काफी मिलती-जुलती लगी। दोनों का जोश और जज्बा कुछ ऐसा रहा जिनसे हमें कुछ सीखना चाहिए।







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